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मुख्यमंत्री साय की संवेदनशील पहल: तुएगोंदी में आदिवासी परंपरा रही कायम, अनुष्ठान संपन्न होने के साथ मांगें पूरी

 छत्तीसगढ़ में बलौदाबाजार हिंसा, बिरनपुर कांड के बाद सरकार सामाजिक मामलों में गंभीरता दिखा रही है। यही वजह है कि आज सीएम साय की संवेदनशील पहल से बालोद जिले में आदिवासी समाज की वर्षों पुरानी मांग पूरी हुई। मुख्यमंत्री सचिवालय के निर्देश पर जिला और पुलिस प्रशासन की देखरेख में जामड़ी पाट में आदिवासी समाज का पारंपरिक अनुष्ठान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई। बताया जा रहा कि यहां महाैल बिगाड़ने के लिए कुछ लोग सनातन और आदिवासियों को आमने-सामने करने की कोशिश में थे, लेकिन शासन-प्रशासन की निगरानी में आदिवासी समाज का जातरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण संपन्न हुआ।

तुएगोंदी स्थित जामड़ी पाट आदिवासी समाज का पारंपरिक अनुष्ठान का केंद्र है, जहां अपनी प्राचीन परंपरा के साथ आदिवासी समाज पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं। इसी स्थान पर ही पाटेश्वर धाम भी है, जहां जमीन विवाद को लेकर आदिवासी समाज के बीच टकराव की स्थिति बनती रही है। इसे सुलझाने और परंपरागत पूजा संपन्न कराने की मांग समाज की ओर से मुख्यमंत्री से की गई थी। विगत दिनों मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आदिवासी समाज के पदाधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की थी, जिसमें समाज के प्रतिनिधियों ने जामड़ी पाट में पारम्परिक देवता की अर्चना और वहां स्थित जलकैना (कुंड) में अपनी पारंपरिक अनुष्ठान की अनुमति को लेकर लंबे समय से चली आ रही मांग रखी थी।

मुख्यमंत्री सचिवालय से होती रही निगरानी

समाज की भावनाओं और परंपराओं का सम्मान करते हुए मुख्यमंत्री ने अविलंब जिला प्रशासन बालोद को आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के स्पष्ट निर्देश दिए। वहीं मुख्यमंत्री सचिवालय लगातार इस मामले की निगरानी करता रहा। मुख्यमंत्री साय के आदेशों का पालन करते हुए जिला प्रशासन की देखरेख में आज जामड़ी पाट में अनुष्ठान का कार्य शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ। जलकैना (कुंड) में आदिवासी समाज के लोगों ने अपनी पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार देव-आराधना की।

पूर्व में घटित घटनाओं के बाद सरकार सजग और सतर्क

मुख्यमंत्री की संवेदनशील पहल की आदिवासी समाज ने सराहना की है, ये इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि कई बार जरा सी चूक या अनदेखी की वजह से बड़ी घटनाएं होती रही है। चाहे बलौदाबाजार हिंसा मामला हो, बीरनपुर कांड हो या कोंडागांव, सुकमा जैसे जिलों में आदिवासी समाज का हिंसात्मक प्रदर्शन हो। साय सरकार पूर्व में घटित घटनाओं को लेकर हमेशा से सजग सतर्क रही है। समाज के बीच एकता, समरसता सदभावना और शांति को लेकर समर्पित रही है। बालोद जिले में भी इस विवाद को लेकर सरकार ने प्राथमिकता और गंभीरता के साथ इस मसले को सुलझाने में जुटे रहे और परिणाम भी सबके अनुकुल रहा है।

जानिए क्या है विवाद का मामला

बता दें कि हाल ही में छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में पाटेश्वर धाम से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर आदिवासी समाज के हजारों लोगों ने कलेक्टर कार्यालय का घेराव किया था। आदिवासी समाज का आरोप है कि पाटेश्वर धाम के बालक दास के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। करीब 12 एकड़ से अधिक भूमि पर अवैध कब्जा किया गया है, जिसे तत्काल हटाया जाना चाहिए। समाज के प्रतिनिधियों का कहना था कि पाटेश्वर धाम में पंचायत के प्रस्ताव के बिना एक करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निर्माण कार्य कराया गया है। उन्होंने इन निर्माणों को अवैध बताते हुए उन्हें हटाने की मांग की थी। साथ ही जलकैनी माता स्थल को नुकसान पहुंचाने और उसे पाटने का भी आरोप लगाया था।

ग्राम सभा की अनुमति के बिना रूढिजन्य पारंपरिक सीमा क्षेत्र के भीतर जल, जंगल, जमीन पर कब्जा, अवैध खनन एवं निर्माण कार्य पर कार्रवाई व 17 मई से 15 जून 2026 तक प्रस्तावित मेला कार्यक्रम पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। इसके बाद प्रशासन ने हस्तक्षेप करते हुए बीते बुधवार को कलेक्टर, एसपी और भारी पुलिस बल की मौजूदगी में जलकैना से सटी बाउंड्री वॉल को छह जेसीबी मशीनों की मदद से हटाया था। साथ ही आदिवासी समाज, प्रशासन और मुख्यमंत्री स्तर पर हुई बैठकों के बाद देव जातरा को शांतिपूर्ण ढंग से आयोजित कराने पर सहमति बनी थी।

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