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हमेशा के लिए बंद हुआ ‘बोफोर्स घोटाला’! सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की आखिरी याचिका, खत्म हुआ 40 साल पुराना कानूनी विवाद

Supreme court On Bofors Scam: भारतीय राजनीति इतिहास सबसे चर्चित घोटालों में एक बोफोर्स घोटाला केस अब हमेशा के लिए बंद हो गया है। 4 दशक यानी 40 साल पुराने केस की आखिरी याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी। इसी के साथ ही बोफोर्स घोटाले’ का अंतिम चैप्टर भी क्लोज हो गया है।

 

जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने वकील अजय के. अग्रवाल की उस अपील पर आगे सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें 2005 के दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने उस फैसले में हिंदुजा बंधुओं और स्वीडिश हथियार निर्माता एबी बोफोर्स के खिलाफ सभी आपराधिक कार्यवाहियों को रद्द कर दिया था।

बेंच ने कहा कि वह 2018 से लंबित मामले को सिर्फ इस सवाल पर टालने के पक्ष में नहीं है। देश के शीर्ष न्यायालय ने कहा कि जांच एजेंसी(CBI) ने भी अपनी चैलेंजिग पीटिशन खारिज होने के बाद अपील नहीं की तो, किसी अन्य की व्यक्तिगत अपील कैसे बनी रह सरती है। इसे भी खारिज किया जाता है। इसे टालने की जरूरत नहीं है। हिंदुजा ब्रदर्स में दो भाइयों श्रीचंद पी हिंदुजा और गोपीचंद पी हिंदुजा का निधन काफी पहले हो चुका है। मामले में प्रतिवादियों में प्रकाश पी हिंदुजा शामिल थे। प्रकाश इन दिनों यूरोप में हिंदुजा ग्रुप के चेयरमैन हैं।

क्या था बोफोर्स मामला
24 मार्च 1986 को भारत सरकार ने स्वीडन की हथियार निर्माता कंपनी Bofors AB से 155 मिमी FH-77B हॉवित्जर तोपें खरीदी थीं। यह डील लगभग 1437 करोड़ रुपये में हुई थी। इस डील के तहत भारतीय सेना को 410 आधुनिक तोपें मिलनी थीं। उस समय इसे भारतीय सेना के आधुनिकीकरण की दिशा में बड़ा कदम माना गया। साल 1987 में स्वीडन के एक रेडियो ने दावा किया कि इस सौदे के बदले भारतीय नेताओं और रक्षा अधिकारियों को घूस दी गई थीष इसके बाद यह मामला देश का एक बड़ा राजनीतिक विवाद बन गया था।

घोटाले में तत्कालीन पीएम राजीव गांधी का भी आया नाम

16 अप्रैल 1987 को स्वीडिश रेडियो के खुलासे ने भारत में राजनीतिक भूचाल ला दिया। विपक्ष ने तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी पर आरोप लगाए कि उनकी सरकार ने पूरे मामले को छिपाने की कोशिश की। हालांकि राजीव गांधी ने संसद और सार्वजनिक मंचों पर रिश्वत लेने के आरोपों से साफ इनकार किया। जांच के दौरान कई भारतीय और विदेशी नागरिकों के नाम सामने आए। इनमें इतालवी कारोबारी ओत्तावियो क्वात्रोच्ची, हथियार एजेंट विन चड्ढा, कारोबारी हिंदुजा ब्रदर्स और कुछ अन्य बिचौलियों के नाम प्रमुख रहे।

जनवरी 1990 में सीबीआई ने शुरू की थी जांच

जनवरी 1990 में सीबीआई ने मामला दर्ज किया और पूर्व बोफोर्स अध्यक्ष मार्टिन आर्डबो, कथित बिचौलिये विन चड्ढा, हिंदुजा बंधुओं और बाद में इतालवी कारोबारी ओत्तावियो क्वात्रोच्ची समेत कई लोगों के खिलाफ जांच शुरू की थी। समय के साथ कई आरोपी या तो बरी हो गए या उनका निधन हो गया। 2011 में क्वात्रोच्ची को भी अदालत ने राहत दे दी थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम अपील खारिज कर दी है। इसी के साथ ही ‘बोफोर्स घोटाले’ का अंतिम चैप्टर भी क्लोज हो गया है।

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