ChhattisgarhHindi news

गंगरेल बांध में उफान! किसी भी वक्त खुल सकते हैं 14 गेट, महानदी किनारे बसे गांवों पर मंडराया बाढ़ का संकट

छत्तीसगढ़ के प्रमुख जलाशयों में शामिल रविशंकर सागर यानी गंगरेल बांध लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से लबालब हो गया है। बांध में 87 फीसदी से ज्यादा पानी भर चुका है और कैचमेंट एरिया में अभी भी झमाझम बारिश जारी है। गंगरेल कोई छोटा तालाब नहीं है, ये वो जलाशय है, जिससे सैकड़ों गांवों की किस्मत जुड़ी है और अब यही गंगरेल बाढ़ का खतरा बन गया है।

गंगरेल के साथ कई बांधों में बढ़ा जलस्तर

दरअसल, गंगरेल के साथ-साथ मुरुमसिल्ली, दुधावा और सोंढूर बांध में भी जबरदस्त जलभराव हो गया है। प्रशासन के अनुसार, गंगरेल में लगातार पानी की आवक जारी है। स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर है। सैलानियों और निचले इलाकों के ग्रामीणों को नदी किनारे न जाने की सख्त हिदायत दी गई है। जिला कलेक्टर की मानें तो अगर बारिश इसी तरह जारी रही तो गंगरेल के गेट किसी भी वक्त खोले जा सकते हैं।

गेट खुलने से बढ़ सकता है बाढ़ का खतरा

आपको बता दें, गंगरेल में 55 हजार क्यूसेक पानी छोड़ने पर ही 72 गांवों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगता है और पिछली बार जब गेट खुले थे तो 1.31 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था, जिसके बाद तो हालात और बिगड़ गए थे। फिलहाल महानदी में पानी की आवक 12.97 टीएमसी हो रही है और सामान्य बहाव है, लेकिन ओडिशा सीमा तक के गांवों में दहशत का माहौल है। सबकी जुबान पर एक ही सवाल है, क्या फिर लौटेगा 2024 जैसी बाढ़ का मंजर?

तो तस्वीर साफ है, एक तरफ बारिश से किसानों के चेहरे पर मुस्कान है। सिंचाई और भूजल स्तर सुधरेगा, तो दूसरी तरफ लबालब गंगरेल अब डरावना भी लगने लगा है। प्रशासन की नजर हर एक इंच जलस्तर पर टिकी है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button