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सुप्रीम कोर्ट पहुंचे 23 विपक्षी दल! CJI सूर्यकांत को पत्र लिख चुनाव आयोग की ‘SIR’ प्रक्रिया को घेरा; लगाया पक्षपात का बड़ा आरोप

India Alliance Wrote a Letter To CJI Surya Kant: इंडिया गठबंधन के 23 पार्टियों ने सीजेआई सूर्यकांत को चिट्ठी लिखी है। इस चिट्ठी में विपक्ष ने देश में चुनावी प्रक्रिया को लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल उठाए हैं। विपक्ष ने लिखा है- मौजूदा परिस्थितियों में देश का चुनावी लोकतंत्र गंभीर खतरे का सामना कर रहा है। लोकतंत्र को कार्यपालिका के अतिरेक से बचाने और स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित कराने के लिए न्यायपालिका से दखल की मांग की है।

बचा दें कि इससे पहले एक निर्दलीय सांसद ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को संयुक्त पत्र लिखकर विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया, चुनाव आयोग की कथित पक्षपातपूर्ण भूमिका और चुनाव से जुड़े अन्य मुद्दों पर न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की थी। अब सभी विपक्षी पार्टियों ने CJI को चिट्ठी लिखी है।

पत्र मेंचुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए लिखा है- हम सभी समान विचारधारा वाले राजनीतिक दलों का प्रतिनिधित्व करते हुए, भाजपा के घोर विरोधी हैं और मानते हैं कि चुनावी प्रक्रिया में हेरफेर किया जा रहा है और कई मामलों में परिणाम जनता की इच्छा के मुताबिक नहीं हैंय़ चुनाव आयोग का गठन हमेशा सत्ताधारी सरकार की ओर से किया जाता रहा है। 2014 के पहले कुछ अपवादों को छोड़ दिया जाए तो ऐसे बहुत कम मामले हैं, जब आयोग में शामिल व्यक्तिों की ईमानदारी पर सवाल उठाए गए हों।

चुनाव आयोग पर लगाए गंभीर आरोप

पत्र में आगे लिखा है-हमारी गंभीर चिंता की वजह चुनाव आयोग, खासतौर से मुख्य चुनाव आयुक्त का पक्षपातपूर्ण आचरण है। चुनावी प्रक्रियाओं के दौरान और परिणामों में भाजपा का खुला और निर्भीक समर्थन किया गया है। आयोग ने सत्ताधारी राजनीतिक दल द्वारा आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन पर कार्रवाई न करके निष्पक्षता का उल्लंघन किया है और साथ ही विपक्ष को निशाना बनाया है। कई मौकों पर आयोग ने उस समय मौन धारण किया था, जब भाजपा के नेता आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन कर रहे थे।

अदालत भरोसा बना रहे इसलिए निभानी होगी जिम्मेदारी

लेटर में आगे लिखा गया, ‘जब संस्थागत तंत्र पूरी तरह विफल हो जाते हैं, तो लोकतंत्र अराजकता में बदल जाते हैं। लिहाजा यह हम सभी का दायित्व है कि लोगों का संस्थानों पर विश्वास बना रहे और इसके लिए संस्थानों को अपनी भूमिका निभानी होगी। हम न्यायपालिका पर सवाल नहीं उठा रहे हैं। वास्तव में, जब हर तंत्र विफल हो जाता है, तब हम अदालतों का रुख करते हैं. जब यह भी विफल हो जाता है, तो यह सवाल उठता है कि अब हम किसकी ओर रुख करें? हम यह सवाल आपके विचार के लिए छोड़ते हैं।

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