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जमीन के टुकड़े पर ठनी! आमने-सामने आए दो पक्ष; सरपंच-पंचों ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी, एक्शन में आए SDM

 छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले से एक बड़ा जमीनी विवाद सामने आया है, जहां मनरेगा के तहत स्वीकृत एक नए तालाब के निर्माण को लेकर दो पक्ष आमने-सामने आ गए हैं। एक तरफ जहां ग्राम पंचायत के सरपंच, उपसरपंच और पंचों समेत ग्रामीणों ने शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे की शिकायत दर्ज कराई है, तो वहीं दूसरी तरफ जिस व्यक्ति पर आरोप लगा है, उसने इन तमाम आरोपों को बेबुनियाद और राजनीतिक साजिश बताते हुए जमीन का वैध सरकारी पट्टा होने का दावा पेश किया है।

पढ़िए पूरी खबर

दरअसल, जनपद पंचायत लोरमी के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत राम्हेपुर (N) के सरपंच, उपसरपंच और तमाम पंचों के हस्ताक्षर वाला आवेदन एसडीएम लोरमी और सीईओ जनपद पंचायत लोरमी को सौंपा गया है। इस शिकायत पत्र में ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि ग्राम पंचायत राम्हेपुर में मनरेगा योजना के अंतर्गत एक नया तालाब स्वीकृत हुआ है, लेकिन आंछीडोंगरी गांव के रामकुमार साहू की ओर से उस शासकीय भूमि पर कथित रूप से कब्जा कर लिया गया है।

ग्रामीणों ने दी चेतावनी

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जब स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने उन्हें समझाने और मना करने की कोशिश की, तो उन्होंने तालाब निर्माण कार्य रोकने की बात कही, जिसके कारण जनहित का यह कार्य प्रारंभ नहीं हो पा रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से इस बेजा-कब्जे को हटाने और ऐसा न होने पर उग्र प्रदर्शन की चेतावनी भी दी है।

आरोपों को सिरे से किया खारिज

इस पूरे मामले में दूसरा पहलू कथित रूप से बेहद मजबूत कानूनी दस्तावेजों के साथ सामने आया है। जिस रामकुमार साहू पर शासकीय जमीन पर अवैध कब्जे का आरोप लगाया जा रहा है, उन्होंने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने उनके इस दावे की पुष्टि के लिए जो आधिकारिक दस्तावेज (फार्म-ए) सामने लाए हैं उसके मुताबिक, तहसीलदार कृषि प्रयोजन के लिए भू-राजस्व संहिता 1959 के तहत ‘भूमि-स्वामी अधिकारों की मंजूरी के लिए पट्टा’ आवंटित किया गया है।

अब स्थिति यह है कि एक तरफ जहां ग्राम पंचायत इसे शासकीय भूमि बताकर जनहित में तालाब निर्माण के लिए कब्जा मुक्त कराने की मांग पर अड़ी है, वहीं दूसरी तरफ रामकुमार साहू के पास कथित रूप से साल 2018 का बना हुआ आधिकारिक पट्टा मौजूद है, जो उन्हें उस भूमि का वैध स्वामी घोषित करता है।

चूंकि मामला सीधे तौर पर राजस्व विभाग और स्थानीय प्रशासन के क्षेत्राधिकार का है और खुद एसडीएम लोरमी ने इस पर जनपद से रिपोर्ट तलब की है, इसलिए अब देखना होगा कि जांच रिपोर्ट में क्या तथ्य सामने आते हैं।

 

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