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पहली ही बारिश में बह गए ₹2.88 करोड़! पुल की एप्रोच रोड ताश के पत्तों की तरह जमींदोज; भ्रष्टाचार की खुली पोल, देखें बर्बादी की तस्वीरें

मानसून की दस्तक के साथ ही सरकारी निर्माण कार्यों की हकीकत सामने आ गई है। छुरा विकासखंड के मड़ेली-जरगांव मार्ग पर घुनघुटी नाला में बन रहे 2.88 करोड़ रुपए के उच्चस्तरीय पुल का एप्रोच रोड पहली ही तेज बारिश में जगह-जगह से कट गया है। मिट्टी का भराव बहने और सड़क धंसने से न सिर्फ निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हुए हैं, बल्कि ग्रामीणों का गुस्सा भी फूट पड़ा है।

भाजपा जिला उपाध्यक्ष प्रीतम सिन्हा ने मौके का निरीक्षण किया। सिन्हा ने कहा कि 5 साल पहले से यह काम मंजूर था। विभाग ठेकेदार पर हमेशा से मेहरबान है और इसी मेहरबानी के चलते ही काम गुणवत्ताहीन हुआ है। मेन स्ट्रक्चर के मापदंडों में भारी समझौता किया गया, क्योंकि 5 साल पुराने एसओआर पर निर्मित पुल को वर्तमान कीमतों पर बनाने समझौता ही एक मात्र विकल्प था।

एसडीओ बोले – 6 परसेंट पेनाल्टी लगाई, नहीं हुआ है काम का भुगतान

इस मामले में निर्माण की देखरेख कर रहे पीडब्ल्यूडी सेतु शाखा के एसडीओ एसके पंडोले ने बताया कि ठेकेदार का भुगतान रोक दिया गया है। बारिश के पहले पिचिंग कार्य पूर्ण नहीं होने और अचानक भारी बारिश के चलते क्षतिग्रस्त हुआ है। कार्य में विलंब के कारण उसे 6 प्रतिशत का पेनाल्टी भी लिया गया है।

जानिए क्या है मामला

ग्राम मड़ेली-जरगांव को जोड़ने वाले इस पुल का निर्माण लोक निर्माण विभाग PWD की सेतु शाखा, रायपुर करवा रही है। सूचना फलक के अनुसार कार्य की प्रशासनिक स्वीकृति 3 करोड़ 91 लाख 75 हजार रुपये की है और 2 करोड़ 88 लाख 64 हजार 800 रुपये की लागत से इसे मेसर्स शिवानी कंस्ट्रक्शन कंपनी रायपुर बना रही है, लेकिन निर्माण पूरा होने से पहले ही हुई बारिश ने पोल खोल दी। पुल के दोनों तरफ किए गए मिट्टी भराव का बड़ा हिस्सा बह गया और एप्रोच रोड कई जगहों से कटकर आवागमन लायक नहीं रहा।

ग्रामीण आक्रोशित, जांच की मांग

स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण में तकनीकी मानकों की अनदेखी और घटिया सामग्री का उपयोग किया गया है।
ग्रामवासियों ने जिला प्रशासन और PWD से 3 प्रमुख मांगें रखी हैं।

  1. तत्काल मरम्मत: क्षतिग्रस्त एप्रोच रोड को तुरंत ठीक किया जाए ताकि आवागमन बहाल हो।
  2. उच्चस्तरीय जांच: पूरे पुल निर्माण की थर्ड पार्टी से तकनीकी जांच कराई जाए।
  3. कार्रवाई: जांच में दोषी पाए जाने पर ठेकेदार और लापरवाह अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई हो।

ग्रामीणों का कहना है, “काम पूरा भी नहीं हुआ और पहली बारिश में ही सड़क बह गई। अगर यही हाल रहा तो उद्घाटन के बाद क्या होगा?”

विभाग का पक्ष और जवाबदेही पर सवाल

शुरुआत में इसे प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का काम बताया जा रहा था, पर सूचना फलक से स्पष्ट हुआ कि यह PWD की ब्रिज शाखा का प्रोजेक्ट है। इस संबंध में PWD एसडीओ मनीष साहू ने पुष्टि की कि निर्माण सेतु शाखा द्वारा कराया जा रहा है। हालांकि खबर लिखे जाने तक विभाग का विस्तृत पक्ष नहीं मिल सका। सूचना फलक पर दिए गए कई अधिकारी या तो सेवानिवृत्त हो चुके हैं या फोन नहीं उठा रहे। पुराने नाम और नंबर होने से परियोजना की निगरानी पर भी सवाल उठ रहे हैं।

बेकार हो जाएगा करोड़ों की लागत से बन रहा पुल

इंजीनियरों का कहना है कि अगर अभी एप्रोच रोड की मरम्मत और मजबूती नहीं की गई तो लगातार बारिश में पूरा भराव बह सकता है और करोड़ों की लागत से बन रहा पुल आवागमन के लिए बेकार हो जाएगा। अब देखना होगा कि PWD इस मामले में क्या कदम उठाता है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।

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