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‘इंडिया’ ब्लॉक को झटका! ओम बिरला की चाय पार्टी से राहुल-अखिलेश गायब, पीएम मोदी के साथ नजर आईं DMK की कनिमोझी

 

Opposition Boycott Om Birla Tea Party: संसद के मानसून सत्र का समापन हो गया है। मानसून सत्र के अंतिम दिन (13 अगस्त) लोकसभा की कार्यवाही सिर्फ 1 मिनट चला। जबकि राज्यसभा करीब 1 घंटे चली। वंदे मातरम गायन के बाद लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित (Lok Sabha adjourned sine die) हो गया। सत्र खत्म होने के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने हमेशा की तरह इस बार भी चाय पार्टी रखी। हालांकि कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी पार्टियों ने इसका बहिष्कार किया। स्पीकर की चाय पार्टी सिर्फ डीएमके (DMK) सांसद कनिमोझी (Kanimozhi) पहुंचीं। कनिमोझी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के साथ चाय पीते हुए चर्चा की।

चाय पार्टी में शामिल नहीं होने पर कांग्रेस ने तर्क दिया कि स्पीकर ने कस्टमरी स्पीच नहीं दिया और न ही ये बताया कि संसद का कामकाज कैसा रहा इसलिए विपक्ष उनकी पारंपरिक चाय पार्टी का बहिष्कार किया। इससे पहले इसमें प्रियंका गांधी को भेजने का कार्यक्रम था। दूसरी तरफ सोनिया और खरगे भी जाने वाले थे। वहीं लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की चाय पार्टी में विपक्ष की तरफ से सिर्फ डीएमके के शामिल होने पर विपक्ष (इंडिया गठबंधन) में खलबली मच गई है।

कनिमोझी का चाय पार्टी में शामिल होना और पीएम मोदी के साथ चर्चा करना एक बड़ा सियासी कदम माना जा रहा है। इसके पीछे की वजह कांग्रेस से गठबंधन टूटना, दक्षिण भारत के प्रतिनिधित्व की लड़ाई और परिसीमन को लेकर दो-तिहाई बहुमत है। डीएमके ने हाल ही में कांग्रेस के साथ गठबंधन तोड़ लिया है। कनिमोझी का इसमें शामिल होना इस बात की ओर भी इशारा है कि DMK भले ही NDA के साथ न हो लेकिन वो परिसीमन के पूरी तरह खिलाफ भी नहीं है।

कांग्रेस ही नहीं बल्कि पूरे विपक्ष के लिए चिंता का सबबब

बता दें कि पिछले साल मानसून सत्र समाप्त होने के बाद जब विपक्ष ने स्पीकर की ‘पारंपरिक चाय पार्टी’ का बहिष्कार किया था। तब उसमें डीएमके भी शामिल थी। उस समय डीएमके का कोई भी नेता चाय पार्टी में शामिल नहीं हुआ था। हालांकि इस बार राजनीति हवा किसी ओर मुड़ गया है। चाय पार्टी में कनिमोझी पहुंचीं। ऐसे में राजनीति पंडित कयास लगा रहे हैं कि डीएमके अब विपक्ष से दूरी बनाते हुए सत्ता पक्ष के करीब दिख रही है। ये सिर्फ कांग्रेस ही नहीं बल्कि पूरे विपक्ष के लिए चिंता का सबब है। अगर डीएमके एनडीए का समर्थन करता है तो पूरा विपक्ष टूटने की कगार पर पहुंच सकता है।

परिसीमन विधेयक पास कराने की राह आसान कर सकती है डीएमके

मोदी सरकार डीएमके को साधे रखती है, तो आने वाले समय में परिसीमन विधेयक की राह आसान हो सकती है। डीएमके के पास 22 लोकसभा सांसद हैं, जो काफी अहम हैं। डीएमके के विरोध के चलते ही सरकार अप्रैल में हुए विशेष सत्र में इस विधेयक को पास नहीं करा सकी थी। अब जिस तरह कनिमोझी स्पीकर की चाय पार्टी में शामिल हुईं। उसके सियासी मायने काफी अहम हो जाते हैं।

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