सरपंचों ने प्रशासन के खिलाफ खोला मोर्चा; उपेक्षा का आरोप लगा सामूहिक इस्तीफे की दी चेतावनी

पांचवीं अनुसूची क्षेत्र मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के तीनों विकासखंडों के सरपंचों ने मंगलवार को जिला प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। विभिन्न समस्याओं और चार सूत्रीय मांगों को लेकर जिला मुख्यालय पहुंचे सरपंचों ने जिला पंचायत कार्यालय और कलेक्टर कार्यालय का घेराव करते हुए प्रशासन पर उनकी समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया। घंटों इंतजार के बाद भी कलेक्टर से मुलाकात नहीं होने पर सरपंचों में भारी नाराजगी देखी गई। उन्होंने प्रशासन के खिलाफ उग्र आंदोलन और सामूहिक इस्तीफे तक की चेतावनी दे डाली।
सरपंच संघ के प्रतिनिधि पहले जिला पंचायत सीईओ भारती चंद्राकर से मिलने पहुंचे थे। सरपंचों का आरोप है कि सीईओ ने उनकी बातें पूरी तरह नहीं सुनीं और पंचायत कार्यों, टैक्स कलेक्शन तथा महिला सरपंचों द्वारा अपने पति या पुत्र को कार्यालय लाने जैसी बातों पर दबावपूर्ण तरीके से चर्चा की। इससे नाराज होकर सभी सरपंच कलेक्टर कार्यालय पहुंचे, जहां उन्हें उम्मीद थी कि उनकी समस्याओं का समाधान किया जाएगा।
दोपहर तक जिले के तीनों विकासखंडों के सैकड़ों सरपंच कलेक्टर कार्यालय परिसर में एकत्रित हो गए और जमीन पर बैठकर कलेक्टर तूलिका प्रजापति का इंतजार करते रहे। कड़ी धूप में घंटों बैठे सरपंचों ने आरोप लगाया कि उन्हें पीने का पानी तक नहीं मिला।
मनरेगा कार्यों में कमीशनखोरी
प्रदर्शन के दौरान सरपंचों ने मनरेगा कार्यों के ऑडिट और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में कथित भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि कई मामलों में दो से पांच प्रतिशत तक कमीशन अग्रिम रूप से देना पड़ता है। कार्य पूरा होने के बाद भी भुगतान के लिए छह महीने से लेकर एक वर्ष तक इंतजार करना पड़ता है।
सरपंचों ने बताया कि भौतिक सत्यापन और मूल्यांकन पूरा होने के बावजूद फाइलों में अलग-अलग त्रुटियां बताकर भुगतान रोका जाता है। उन्हें स्वयं जनपद कार्यालयों में एक टेबल से दूसरी टेबल तक फाइलें लेकर घूमना पड़ता है। एक ही निर्माण कार्य से संबंधित नक्शा, खसरा, प्रस्ताव और अन्य दस्तावेज छह से सात बार तक जमा करवाने पड़ते हैं, फिर भी समय पर निराकरण नहीं होता।
पंचायतों को सम्मान देने की मांग
सरपंचों ने अपने मानदेय में वृद्धि की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि पंचायतों पर लगातार अतिरिक्त जिम्मेदारियां डाली जा रही हैं, जबकि जनपद और जिला पंचायत स्तर से अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि शासन की विभिन्न योजनाओं का क्रियान्वयन पंचायतों के माध्यम से कराया जाता है, लेकिन जनप्रतिनिधियों को सम्मान नहीं दिया जाता।
“सुशासन तिहार” पर उठाए सवाल
प्रदर्शन कर रहे सरपंचों ने राज्य सरकार के “सुशासन तिहार” कार्यक्रम पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि यह “सुशासन नहीं बल्कि कुशासन तिहार” बन गया है। पंचायतों पर अनावश्यक दबाव डाला जा रहा है और जनता के समय तथा संसाधनों की बर्बादी हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभिन्न शिकायतों और आवेदनों के बावजूद पिछले वर्ष के सुशासन तिहार के समस्याओं का समाधान नहीं किया गया है।
कलेक्टर से मुलाकात नहीं होने पर भड़के सरपंच
घंटों इंतजार के बाद जब कलेक्टर सरपंचों से मिलने नहीं पहुंचीं और केवल तीनों विकासखंडों से छह-छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को बुलाने का संदेश भेजा गया, तो सरपंच और अधिक नाराज हो गए। उनका कहना था कि दूर-दराज क्षेत्रों से आए सभी जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा की गई है। उसके बाद बिना ज्ञापन दिए ही सरपंच लौटे।
सरपंचों ने आरोप लगाया कि प्रशासनिक अधिकारियों को यह तक जानकारी नहीं है कि क्षेत्र के जनप्रतिनिधि कौन हैं। उन्होंने भनसुला में आयोजित सुशासन तिहार कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा की उपस्थिति में भी संबंधित पंचायत के सरपंच को ज्ञापन देने से तहसीलदार द्वारा रोक दिया गया था, जबकि उनके पंचायत में हो रहे कार्यक्रम की तैयारी में खुद एक सप्ताह से लगे हुए थे।
खत्म करना होगा अधिकारी राज
मौके पर सरपंचों ने कहा कि पंचायतें सभी विभागों के जमीनी कार्यों को संभालती हैं, फिर भी उन्हें उचित सम्मान नहीं मिलता। उन्होंने जिले में “अधिकारी राज” समाप्त करने की बात कही। सरपंचों का कहना था कि वे जनता के चुने हुए प्रतिनिधि हैं और प्रशासन उन्हें आदेश देने की बजाय सम्मानपूर्वक संवाद करे।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समस्याओं का जल्द समाधान नहीं हुआ तो कलेक्टर के खिलाफ व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा तथा उनके तबादले की मांग की जाएगी। साथ ही जिले भर के सभी सरपंच सामूहिक इस्तीफा देने पर भी विचार करेंगे।
ग्राम सभा बहिष्कार करने की घोषणा
जिला सरपंच संघ के अध्यक्ष पुष्पेंद्र भुआर्य ने कहा कि जिले भर के सरपंच बिना किसी नारेबाजी के शांतिपूर्ण ढंग से कलेक्टर कार्यालय के बाहर जमीन पर बैठ कर इंतजार कर रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि कलेक्टर उनके सामने से गुजरकर अपने कक्ष में चली गईं, लेकिन उनसे मिलने नहीं आईं।
उन्होंने कहा कि केवल प्रतिनिधिमंडल को बुलाना पूरे जिले के सरपंचों का अपमान है। इसी के विरोध में बुधवार को आयोजित होने वाली ग्राम सभाओं के बहिष्कार की घोषणा की गई है। साथ ही पंचायतों के प्रशासनिक कार्य भी बंद रखने का निर्णय लिया गया है। हालांकि जनता की समस्याओं की सुनवाई जारी रखने की बात सरपंच संघ ने कही है। सरपंच संघ ने स्पष्ट किया कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं की गई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।



