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राघवेंद्र मर्डर केस में आया कोर्ट का अंतिम फैसला! दो हत्यारों को उम्रकैद की सजा, सबूतों के अभाव में एक आरोपी बरी

 ​जिले के बहुचर्चित राघवेंद्र पटेल हत्याकांड में द्वितीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ज्योति अग्रवाल की अदालत ने फैसला सुनाया है। न्यायालय ने दो मुख्य आरोपियों ऋषि रैदास और रविशंकर श्रीवास्तव को हत्या, आपराधिक षडयंत्र और साक्ष्य मिटाने का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। वहीं सह-आरोपी संतोष चौधरी को साक्ष्य के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया है। प्रकरण का एक अन्य आरोपी काजल कुमार मन्ना अब भी फरार है।

दरअसल पूरा मामला जून 2021 का है, जहां ​क्षणिक लालच में दोस्त राघवेंद्र पटेल की हत्या की गई थी। अभियोजन के अनुसार, जून 2021 में आरोपियों ने आपसी तालमेल और आपराधिक षडयंत्र के तहत अपने ही मित्र राघवेंद्र पटेल की ग्राम श्रृंगारबहरा (मरवाही) में गमछे से गला घोंटकर हत्या कर दी थी। इसके बाद साक्ष्य छुपाने के उद्देश्य से शव पर पेट्रोल डालकर उसे जला दिया था। पुलिस विवेचना के दौरान बलेनो कार की जब्ती, टोल/रजिस्टर एंट्री, पेट्रोल पंप व होटल के सीसीटीवी फुटेज और फॉरेंसिक (FSL) रिपोर्ट को न्यायालय ने वैज्ञानिक साक्ष्य माना।

कम सजा की अपील पर ​अदालत की सख्त टिप्पणी

बचाव पक्ष द्वारा कम सजा की अपील पर न्यायाधीश ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि पूर्व की मित्रता के बावजूद महज क्षणिक लालच में आकर इस तरह की सोची-समझी क्रूर हत्या करना गंभीर मानसिक विकृति को दर्शाता है। ऐसे मामले में अपराधियों के प्रति नरमी नहीं बरती जा सकती।

आरोपियों को ​जुर्माने के साथ भुगतनी होगी सजा

न्यायालय ने दोनों दोषियों को भादंवि की धारा 302/34 व 120बी के तहत आजीवन कारावास व 2,000-2,000 रुपये अर्थदंड, तथा धारा 201/34 के तहत 3 वर्ष के कठोर कारावास व 1,000-1,000 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड न देने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। न्यायालय के आदेशानुसार सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। इस प्रकरण में अभियोजन पक्ष की ओर से सरकारी वकील कौशल सिंह ने पैरवी की।

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