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राशन दुकान में ओवर रेटिंग और अव्यवस्था: शिकायत लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे वार्डवासी, संचालक बदलने की मांग

जिले के दाऊचौरा की राशन दुकान में सरकारी दर से ज्यादा कीमत वसूले जाने और वितरण में अनियमितताओं को लेकर सोमवार को उपभोक्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। बड़ी संख्या में 16 और 17 वार्ड के वार्डवासियों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर राशन दुकान संचालक के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए संचालन बदलने की मांग कर डाली।

वार्ड क्रमांक 16 के पार्षद विनय देवांगन के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली की राशन दुकान का संचालन पिछले कई महीनों से दाऊचौरा क्षेत्र के बजाय संचालक के निजी निवास से किया जा रहा है, जो वार्ड से करीब एक किलोमीटर दूर है। ऐसे में बुजुर्ग, महिलाएं और दिव्यांग हितग्राही सबसे अधिक परेशान हो रहे हैं।

17 की शक्कर 20 में!

वार्डवासियों का सबसे बड़ा आरोप शक्कर की कीमत को लेकर है। उनका कहना है कि शासन द्वारा 17 रुपये प्रति किलो निर्धारित दर पर मिलने वाली शक्कर 20 रुपये प्रति किलो में बेची जा रही है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, राशन दुकान निर्धारित समय और तिथि पर नहीं खुलती। कई हितग्राही बार-बार चक्कर लगाने के बाद भी खाली हाथ लौटने को मजबूर होते हैं। नाप-तौल में गड़बड़ी, राशन वितरण में पारदर्शिता की कमी और शिकायत करने पर अभद्र व्यवहार किए जाने के आरोप भी ज्ञापन में दर्ज हैं।

दो महीने की शक्कर अब तक गायब

वार्डवासियों का कहना है कि मई और जून माह की शक्कर का वितरण अब तक नहीं किया गया है। इससे हितग्राहियों में नाराजगी लगातार बढ़ रही है। लोगों का आरोप है कि शिकायत करने पर समाधान की जगह उन्हें धमकियां सुनने को मिलती हैं।

सवाल सिर्फ एक राशन दुकान का नहीं है, बल्कि उस निगरानी तंत्र का भी है, जिसके भरोसे सार्वजनिक वितरण प्रणाली संचालित होती है। यदि वार्डवासियों के आरोप सही हैं, तो महीनों तक अनियमितताएं चलती रहीं और जिम्मेदार विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी। यह स्थिति खाद्य विभाग की मॉनिटरिंग व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने जिला खाद्य अधिकारी भुनेश्वर चेलक को जांच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। खाद्य अधिकारी ने शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। अब निगाहें जांच पर टिकी हैं। देखना होगा कि वार्डवासियों की शिकायतों में कितना दम निकलता है और क्या दाऊचौरा की राशन दुकान में फिर से व्यवस्था की “मिठास” लौट पाती है या नहीं।

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