‘मिशन इंडो-पैसिफिक’ पर पीएम मोदी! आज से 3 देशों के महा-दौरे पर निकले प्रधानमंत्री; 40 साल बाद न्यूजीलैंड की धरती पर कदम रखेगा कोई भारतीय PM

पीएम मोदी आज से तीन देशों के 6 दिवसीय दौरे पर रवाना हो रहे हैं. भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के दौरे के लिए नई दिल्ली से रवाना हो गए हैं. भारत का मकसद इन तीनों देशों के साथ अपने रिश्ते और मजबूत करने के साथ साथ इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक मौजूदगी को और मजबूत करना भी है. इस दौरे की शुरुआत इंडोनेशिया से होगी.
यह यात्रा भारत की हिंद प्रशांत क्षेत्र को लेकर जारी कूटनीति, समुद्री सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत करने की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 6 से 11 जुलाई 2026 तक इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की छह दिवसीय यात्रा पर निकल गए है. इंडोनेशिया के वर्तमान राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के निमंत्रण पर प्रधानमंत्री मोदी 6 से 8 जुलाई तक इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में रहेंगे. जनवरी 2025 में राष्ट्रपति प्रबोवो भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि भी रहे थे.
प्रधानमंत्री मोदी जकार्ता में मुख्य कार्यक्रमों में भाग लेंगे और सांस्कृतिक-ऐतिहासिक शहर योग्याकर्ता भी जाएंगे. इंडोनेशिया मलक्का जलडमरूमध्य की सुरक्षा और स्थिरता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति प्रबोवो रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, निवेश और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा करेंगे.
इंडोनेशिया दौरे के बाद पीएम का दूसरा पड़ाव 8 से 10 जुलाई ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न है. ऑस्ट्रेलिया के साथ हाल ही में एफटीए लागू किया गया है. ऑस्ट्रेलिया में दोनों नेताओं का विषय वार्ता में रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग, व्यापार और निवेश, शिक्षा, स्किल एवं मोबिलिटी, क्रिटिकल और इमर्जिंग टेक्नोलॉजी, खेल और स्पोर्ट्स साइंस जैसे क्षेत्रों पर विशेष जोर रहेगा.
पीएम मोदी दौरे का अंतिम चरण 10-11 जुलाई न्यूजीलैंड के ऑकलैंड है. न्यूजीलैंड के साथ एफटीए पर हस्ताक्षर हो चुका है लेकिन अभी लागू नहीं किया गया है. न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के साथ द्विपक्षीय वार्ता में व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग के साथ-साथ हाल ही में दोनों देशों के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के क्रियान्वयन पर भी चर्चा होने की संभावना है.
यह 40 वर्षों में भारतीय प्रधानमंत्री की पहली न्यूजीलैंड यात्रा होगी. भारत ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की सरकारों के समक्ष भारत-विरोधी गतिविधियों, खासकर खालिस्तान समर्थकों द्वारा हिंसक अतिवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने का मुद्दा भी मजबूती से उठाएगा.



